एंटीऑक्सीडेंट्स के सौंदर्य फायदे हिंदी में – Anti Oxidant Benefits

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सेहतमंद चीजों की बात हो तो एंटीऑक्सीडेंट्स का जिक्र आना स्वाभाविक है. ताजी सब्जियों और फलों में पाए जाने वाले ये पोषक तत्व  न सिर्फ बीमारियों से हमारी रक्षा करते हैं, बल्कि त्वचा को भी खूबसूरत बनाते हैं.कौन- कौन से हैं ये एंटीऑक्सीडेंट्स और किन-किन चीजों से हो सकती है इनकी पूर्ति आइए जानते है…

क्या है एंटीऑक्सीडेंट्स ?

एंटीऑक्सीडेंट्स व पोषक तत्व (विटामिन व मिनरल्स) व एंजाइम्स (शरीर में मौजूद प्रोटीन) है, जो शरीर के कोशिकाओं को फ्री रेडिकल्स से होने वाले क्षति से सुरक्षा प्रदान करते हैं. आपको बता दें कि यदि इन फ्री रेडिकल्स को नियंत्रित न रखा जाए और इनके खतरे को कम न किया जाए तो शरीर कई प्रकार की बीमारियों की चपेट में आ सकता है. इतना ही नहीं, यह हमारी त्वचा को भी नुकसान पहुंचा सकता है.  

कैसे करें एंटीऑक्सीडेंट की पूर्ति ?

नेचर में ऐसे कई फल, सब्जियां आदि मौजूद है, जो एंटीऑक्सीडेंट्स के बेहतरीन स्त्रोत हैं. आपको बस कभी अपने स्वाद, तो कभी मौसम के आधार पर इन फल और सब्जियों को चुनना तथा उन्हें अपने डाइट में शामिल करना है. जिससे ना सिर्फ आपकी सेहत अच्छी रहेगी, बल्कि त्वचा और बालों की खूबसूरती भी बढ़ेगी.

विटामिन सी विटामिन सी एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है, जो स्किन को सूर्य की किरणों से होने वाले नुकसान से सुरक्षित रखता है.

स्रोत: हरी सब्जियां, संतरा, नींबू, मोसंबी जैसे सिट्रस फल, आंवला, स्ट्रौबरी,चेरी, अंगूर आदि से विटामिन सी की आपूर्ति होती है.  

विटामिन ई विटामिन ई एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है जो न सिर्फ स्किन को सूर्य की किरणों से बचाता है, बल्कि स्किन के टेक्सचर को भी अच्छा बनाए रखता है.

स्रोत: विटामिन ई की आपूर्ति के लिए नींबू,संतरा, नारंगी, व्हीटजर्म, सूरजमुखी के बीज, व तेल,शकरकंद, अवोकेडो, नाशपाती, पालक आदि का सेवन करें.  

ओमेगा 3 फैटी एसिड ओमेगा 3 फैटी एसिड स्किन में होने वाले किसी भी तरह के सूजन को रोकता है.    

स्त्रोत: सैल्मन, टूना व अन्य मछलियाँ, अखरोट,जैतून का तेल, अलसी का तेल, ननट्स आदि  ओमेगा-3 फैटी एसिड की आपूर्ति के लिए उपयुक्त है.  

जिंक यह कोशिकाओं को रिपेयर करने व उन्हें पुनर्जीवन देने के लिए जरूरी है. एक्ने से परेशान त्वचा को जिंक  की खासतौर से जरूरत पड़ती है.   

स्त्रोत:जिंक की आपूर्ति के लिए राजमा, काजू, बादाम,मटर, मूंगफली, चिकन लेग, ब्रैस्ट मछलियां व अन्य सीफूड जैसे लोबस्टर, क्रैब व ऑयस्टर को अपने डाइट प्लान में शामिल करें.  

विटामिन ए विटामिन ए कोशिकाओं को रिपेयर करने के लिए बेहद जरूरी है. यह हेयर और स्किन दोनों को हेल्दी बनाए रखता है. खासतौर से एक्ने से परेशान स्किन के लिए विटामिन ए बहुत लाभदायक एंटीऑक्सीडेंट माना जाता है.  

स्रोत:हरी पत्तेदार सब्जियों, नारंगी, और पीले रंग की सब्जियां आदि विटामिन ए की पूर्ति के लिए उपयुक्त है.  

विटामिन बी कांपलेक्स स्किन को खतरे से हेल्थी बनाए रखने के लिए विटामिन बी कॉन्प्लेक्स की खास जरूरत होती है.  

स्त्रोत: विटामिन बी कॉन्प्लेक्स की आपूर्ति साबुत अनाज, नट्स, मीट,आलू, केला, सूखे आलूबुखारा, आदि से की जा सकती है.  

बायोटिन बायोटीन एंटीऑक्सीडेंट स्वस्थ बालों व खूबसूरत नेल्स के लिए जरूरी है.

स्त्रोत: अंडे का पीला भाग, मूंगफली, मूंगफली से बना बटर (पीनट बटर) पहाड़ी बादाम आदि बायोटीन की जरूरत को पूरा करते हैं. अतः इन्हें अपने डाइट में जरूर शामिल करें.  

➨ बचें ओवरडोज से

बीटा-कैरोटीन, ल्यूटिन, लाइकोपिन, विटामिंस जैसे एंटीऑक्सीडेंट प्राकृतिक तौर पर कई तरह के फल, सब्जियों, मीट आदि में मौजूद होते हैं. इसके लिए किसी तरह के सप्लीमेंट्स लेने की जरूरत नहीं, विशेषज्ञ मानते हैं, कि संतुलन आहार लेने पर शरीर को सभी जरूरत एंटीऑक्सीडेंट मिल जाते हैं. जबकि बिना विशेषज्ञ की राय के लिए सप्लीमेंट्स लेना नुकसानदायक हो सकता है, क्योंकि शरीर में अत्यधिक एंटीऑक्सीडेंट की मात्रा हानिकारक होती है.  

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डायबिटीज के प्रकार और लक्षण – Types of Diabetes

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आज भी अधिकांश लोगों के मन में यही धारणा है, कि ज्यादा मीठा खाने से डायबिटीज होता है, लेकिन हकीकत तो यह है कि मीठा खाने से डायबिटीज नहीं होता, मगर यह सच है कि अगर डायबिटीज के मरीज मीठा खाते हैं, तो इससे उनका शुगर लेवल अनियंत्रित हो जाता है और स्थिति गंभीर हो सकती है.

डायबिटीज को साइलेंट किलर भी कहा जाता है, जिससे कई गंभीर बीमारियां जन्म ले सकती हैं. यह एक ऐसी अवस्था है, जिसमें पीड़ित व्यक्ति का ब्लड शुगर लेवल ज्यादा बढ़ जाता है, क्योंकि शरीर में इंसुलिन का पर्याप्त उत्पादन नहीं हो पाता है.

आखिर किन कारणों से होता है डायबिटीज, चलिए इस पर विस्तार से चर्चा करते हैं…

डायबिटीज के प्रकार

आमतौर पर डायबिटीज के दो प्रकार होते हैं, टाइप 1 और टाइप 2 हालांकि इसे पूरी तरह से ठीक नहीं किया जा सकता, लेकिन इलाज, डाइट, और लाइफस्टाइल में सकारात्मक परिवर्तन करके इसे कंट्रोल जरूर किया जा सकता है.

टाइप 1 डायबिटीज

इसमें इंसुलिन उत्पादन करने वाली कोशिकाएं प्रतिरक्षा प्रणाली द्वारा नष्ट हो जाती हैं, जिससे शरीर में इंसुलिन का उत्पादन उत्पादन नहीं हो पाता. इससे पीड़ित लोगों को जीवन पर्यंत इंसुलिन का इंजेक्शन लेना पड़ता है. डायबिटीज के कुल मामलों में टाइप 1 डायबिटीज के केवल 10 फ़ीसदी मामले ही पाए जाते हैं, लेकिन यह किसी भी उम्र के लोगों को अपना शिकार बना सकता है.

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टाइप 2 डायबिटीज

इससे पीड़ित व्यक्ति का शरीर क्रिया द्वारा उत्पादित होने वाले इंसुलिन का उपयोग नहीं कर पाता या फिर शरीर पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन का उत्पादन नहीं कर पाता है. दुनियाभर में डायबिटीज के मामलों में 90 फ़ीसदी टाइप 2 डायबिटीज के मामले पाए जाते हैं. गलत खानपान मोटापा और खराब लाइफस्टाइल आपको इसका मरीज बना दे सकती है.

एक अध्ययन के अनुसार जो लोग हर रोज एक कैंड सोडा पीते हैं, उनमें टाइप 2 डायबिटीज का खतरा दूसरों की अपेक्षा 22 फ़ीसदी तक अधिक होता है, इसके अलावा जिन पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का स्तर कम होता है, उनमें भी इसका खतरा ज्यादा होता है.  

जेस्टेशनल डायबिटीज

सामान्यतः जेस्टेशनल डायबिटीज का खतरा महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान होता है. गर्भावस्था के दौरान कई महिलाओं के ब्लड में शुगर अनियंत्रित हो जाता है, जिसका असर उनके गर्भ में पल रहे शिशु पर भी पड़ता है. गर्भावस्था में डायबिटीज होने से बच्चे का आकार बड़ा हो जाता है, क्योंकि बच्चे के पेनक्रियाज मां के ब्लड ग्लूकोस के हिसाब से संतुलन बनाने लगते हैं. गर्भावस्था में अगर डायबिटीज अनियंत्रित हो जाए तो बच्चे के जन्म के समय परेशानी हो सकती है. इससे बच्चे का वजन और उसकी लंबाई सामान्य से अधिक हो सकती है. हालांकि समय पर जांच कराकर इसे कंट्रोल किया जा सकता है.

सामान्य लक्षण-

  • वजन घटना या बढ़ना.
  • बार-बार पेशाब आना.
  • अधिक प्यास लगना.
  • इम्यूनिटी कमजोर होना.
  • जख्मों का देर से भरना.
  • हरदम थकान महसूस होना.
  • पुरुषों में कामोत्तेजना की कमी.
  • हाथ में पैरों का सुन्न पड़ जाना.

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दिन की शुरुआत इस तरह करें – Self Improvement Tips

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दोस्तों, आज हम आपको Self Improvement Tips के बारें में आपको बताने जा हैं जिससे की आपका हर दिन बेहतरीन तरीके से गुजरें और आप अपनी जिंदगी का अधिक आनंद लें सकें।

क्या आप सुकून भरा खुशनुमा और तनावमुक्त दिन चाहते हैं,अगर हां तो इसके लिए आपको बस एक छोटा सा काम करना होगा, वह यह कि आपको अपनी सुबह की शुरुआत का अंदाज बदलना होगा. क्या आपने कभी इस बात पर ध्यान दिया है, कि अगर दिन की शुरुआत हड़बड़ाहट में की जाए तो पूरा दिन वैसे ही गुजर जाता हैं.

दिन की शुरुआत आपकी पूरे दिन की दिशा निर्धारित करती है, इसलिए बहुत जरूरी है कि सुबह का समय अच्छा बीते. दिन की अच्छी शुरुआत के लिए आपको अपनी दिनचर्या में इन आदतों को शामिल करना होगा..

खुद के लिए वक्त निकालें

सुबह उठने के बाद काम और ऑफिस के बारे में सोचने से पहले 60 सेकंड निकाल कर अपने लिए कोई ऐसा काम सोचें, जिसे करने पर आपको खुशी मिलती हो, फिर उस काम को पूरा करें, जैसे सुबह-सुबह बगीचे में पहले अकेले ही वक्त पर निकल जाएं, या फिर कोई भी ऐसा काम करें जो आपको खुशी और संतुष्टि दे.

संतुलित आहार लें

अपने सुबह की शुरुआत कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन युक्त डाइट जैसे ओटमील, टोस्ट, बटर आदि से करें. एक शोध के मुताबिक हेल्दी ब्रेकफास्ट मूड इंप्रूव करने के साथ ही आपकी अलर्टनेस भी बढ़ाता है. एक अन्य रिसर्च के अनुसार कैफीन की संतुलित मात्रा एक दिन में करीब दो कप कॉफी मूड के साथ ही आपकी मेंटल शार्पनेस भी बढ़ाता है, तो अपने ब्रेकफास्ट में कॉफी या ब्लैकटी को शामिल करना न भूलें.

खुली हवा में सांस ले

सुबह घर के काम निपटा कर आप ऑफिस जाने की जल्दी में होती हैं, फिर भी थोड़ा सा समय निकाल कर बाहर निकले और सुबह की ताजा हवा में कुछ हल्की-फुल्की एक्सरसाइज करें. आपके लिए वॉकिंग और गार्डनिंग भी अच्छा ऑप्शन है. सिर्फ 10 मिनट की एक्सरसाइज भी मूड फ्रेश करके आपको तरोताजा बना देगी. एक रिसर्च के अनुसार पानी किनारे (बीच, नदी या झील) की गई एक्सरसाइज ज्यादा फायदेमंद रहती है, तो अगर आप समुंदर किनारे रहते हैं, तो रोजाना सुबह बीच की सैर पर निकल जाएं.

सुनें कुदरती आवाज

जब आप सुहानी सुबह में बाहर निकले तो पक्षियों हवा और बहते पानी की कुदरती आवाज को ध्यान से सुनें. आपको सुकून का एहसास होगा, अगर आप बाहर नहीं निकल सकते, तो कोई बात नहीं, आपको कुदरती आवाजों को रिकॉर्ड करके भी सुन सकते हैं, या सुबह खिड़कियां खोलकर घर के बाकी काम करते हुए भी आप प्रकृति की मधुर आवाज का आनंद उठा सकते हैं. हाल ही में हुए एक शोध में पाया गया है, कि बहते पानी और पक्षियों की संयुक्त आवाज सुनने वाला व्यक्ति तनावग्रस्त माहौल से उबरने में जल्दी सफल रहा.

फील गुड फैक्टर पर फोकस करें

विशेषज्ञों के मुताबिक सुबह उठने पर पांच बार गहरी सांस लेकर निर्णय करें, कि आज दिन भर अच्छा महसूस करेंगे. ऐसा करने पर आप तनावग्रस्त व मुश्किल हालात में भी धैर्य से काम कर पाएंगे. किसी बात पर तुरंत बिना सोचे समझे प्रतिक्रिया नहीं देंगे, पूरे दिन बीच-बीच में पांच गहरी सांसे लेते रहें और सुबह के अपने निर्णय को याद रखें.

हॉट चॉकलेट पियें

एक शोध से पता चला है, कि कोको युक्त ड्रिंक पीने से मूड के साथ ही अलर्टनेस लेवल भी बढ़ता है, तो आप भी लो फैट दूध में डार्क चॉकलेट मिक्स करके गरमा – गरम कोको के स्वाद का लुत्फ उठाएं. इसमें मौजूद मौजूद प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट आपके ब्लड शुगर लेवल को स्थिर रखता है, जिससे (मूड का बदलना) की समस्या नहीं होती.

खुद को परखें

सुबह आंख खुलते ही तुरंत बिस्तर से उतर जाने के बजाय 5 मिनट बैठ कर अपने शरीर पर ध्यान दें, यदि आपको अकड़न महसूस हो तो गहरी सांस लेते हुए कुछ स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करें. विशेषज्ञों का मानना है कि घर और ऑफिस के ढेर सारे कामों में उलझने से पहले 5 मिनट के लिए अपने शरीर का ध्यान देने से आप फ्रेश फील करेंगे और दिन भर के बिजी शेड्यूल को अच्छी तरह मैनेज कर पाएंगे.

सकारात्मक बातें सोचें

सुबह-सुबह उठते ही जिंदगी की मुश्किलों और नकारात्मक बातों को सोच कर अपना मूड खराब करने की बजाय, कुछ सकारात्मक सोचे जैसे आपको अपना ड्रीम जॉब कैसे मिला?, अपने हमसफर से आपकी मुलाकात कैसे हुई, आदि. फिर कल्पना करें कि इन सब के बिना आपकी जिंदगी कैसी होती?  शायद आप सोच रहे होंगे कि इन सब का उल्टा असर होगा, लेकिन ऐसा नहीं है. विशेषज्ञों का कहना है, पोजिटिव सोच दिन भर आपका मूड अच्छा रखती है.

फ्रेश फील के लिए मिंट

एक रिसर्च से यह बात सामने आई, की पिपरमेंट की खुशबू मूड ठीक करने के साथ ही आपकी थकान भी दूर करती है. अतः अपने पास पिपरमिंट इंसेंटियन ऑयल की बोतल या मिंट टी का पैकेट रखें, ताकि सुबह उठते ही इसकी खुशबू आपको ताजगी का एहसास दिलाए. आप चाहे तो ब्रेकफास्ट के बाद पेपर मिंट चिंगम भी चबा सकते है.

हंसी

तनावमुक्त और खुश रहने के लिए हंसी से अच्छी दवा और कोई नहीं हो सकती. हंसी ना सिर्फ आपका, बल्कि आपके आसपास के लोगों का भी मूड चेंज कर सकती है, तो एक मीठी मुस्कान के साथ सुबह की शुरुआत करके तो देखिए, आपकी जिंदगी में खुशी की मिठास घुल जाएगी…

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डिप्रेशन भगाने के लिए रोना है जरूरी -How to overcome depression

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overcome depression

जापान में लोगों को तनाव दूर करने के लिए हंसने की बजाय रोना रुलाने पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है, वहां की कंपनियां और स्कूल अपने कर्मचारियों और छात्रों को हफ्ते में एक दिन जमकर रोने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं.

दुनिया में जापानियों को काफी मेहनती माना जाता है, वहां के लोग सबसे कम छुट्टियां लेते हैं, और सबसे ज्यादा काम करते हैं. हालांकि इसके फायदे बहुत हैं, लेकिन इस वजह से उन्हें काफी तनाव भी होता है ऐसे में अपने नागरिकों को तनावमुक्त रखने के लिए जापान सरकार एक नया तरीका अपना रही है, वहां लोगों का तनाव भगाने के लिए उन्हें हंसाने की बजाय रुलाने पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है

कंपनियां और स्कूल अपने कर्मचारियों और छात्रों को हफ्ते में एक दिन जमकर रोने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं रोने के फायदे बताने के लिए जापान में खास तरह के टियर्स टीचर्स यानी आंसू लाने वाले ट्रेनर्स भी तैयार किए जा रहे हैं.

रोने के फायदे पर किया गया शोध

जापान की एक हाई स्कूल टीचर 76 वर्षीय हिडिफुमी योशिदा ने 5-6 साल पहले रोने से होने वाले फायदे पर शोध और प्रयोग शुरू किए, उनके इन प्रयासों के कारण उन्हें जापान में नामिदा सेंसेई यानि टीयर्स टीचर्स के तौर पर जाना जाता है, योशिदा की जापानी कंपनियों और स्कूलों में भारी मांग है, उन्हें कंपनी और स्कूलों में रोने के फायदे बताने और लोगों को रुलाने के लिए आमंत्रित किया जाता है.

जापान सरकार ने भी की पहल

योशिदा के रुलाकर तनाव भगाने वाले एक्सपेरिमेंट्स पर तोहो यूनिवर्सिटी की मेडिसिन फैकल्टी के प्रमुख प्रोफेसर हिदेहो अरीटा भी शोध कर चुके हैं, इन दोनों के प्रयोग और रिसर्च से साबित हुआ है, कि हंसने और सोने के मुकाबले रोने से ज्यादा जल्दी तनाव खत्म होता है,

हफ्ते में एक बार रोने से स्ट्रेस फ्री लाइफ जीने में बड़ी मदद मिलती है. इनके शोध से निकले नतीजों को देखते हुए जापान सरकार ने साल 2017 में 50 से ज्यादा कर्मचारियों वाली कंपनियों के लिए तनाव मुक्त रहने के लिए कदम उठाना अनिवार्य कर दिया था.

मनोचिकित्सक भी देते हैं रोने की सलाह

रोने से तनाव कम होने के संबंध को लेकर 36 साल पहले 80 देशों में एक सर्वे हुआ था, इस सर्वे में हिस्सा लेने वाले 80 फ़ीसदी से ज्यादा लोगों ने माना था, कि तनाव दूर करने में रोना उनके लिए ज्यादा असरदार साबित होता है, वही दुनिया के 90 फ़ीसदी मनोचिकित्सक तनाव से जूझ रहे लोगों को रोने की सलाह देते हैं. इसे डिप्रेशन को बहुत हद तक दूर किया जा सकता है.

रोने से मन हल्का तो होता ही है तनाव भी भाग जाता है, इसलिए कोशिश करें कि आप जब भी तनाव में हो एक बार रो कर देख, ले चुटकी में ही आपका तनाव भाग जाएगा आप रिफ्रेश और आत्मविश्वाश फील करेंगे.

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Diabetes Problems & Treatment डायबिटीज के दुस्प्रभाव और निवारण

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डायबिटीज के क्या जोखिम हो सकते हैं, और उसका निपटारा कैसे करें !डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है, जो जीवन भर मरीज का पीछा नहीं छोड़ती है. लेकिन इलाज के साथ लाइफस्टाइल में बदलाव की मदद से इसे काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है.

हालांकि डायबिटीज के मरीज को निम्न स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा सामान्य लोगों की अपेक्षा अधिक होता है…

1. ग्लूकोमा, मोतियाबिंद, रेटिनोपैथी और आंखों से जुड़ी अन्य गंभीर समस्याएं हो सकती हैं.  

2. स्किन इन्फेक्शन और स्किन डिसऑर्डर जैसी त्वचा संबंधी समस्याओं का खतरा अधिक होता है.  

3. डायबिटीज पेशेंट को हाइपरटेंशन, किडनी, हृदय रोग और स्ट्रोक का खतरा अधिक होता है. डिप्रैशन, एंजायटी जैसी मानसिक बीमारियों के होने की संभावना बढ़ जाती है.  

4. पीड़ित व्यक्ति की सुनने की क्षमता पर असर पड़ता है, या फिर बहरेपन की समस्या हो सकती है.  

5. पैरों में दर्द, जुकाम, न्यूरोपैथी, गैंग्रीन और कभी-कभी चलने में परेशानी महसूस हो सकती है.  

6. डायबिटीज के रोगियों के पेट के मसल्स ठीक से अपना काम नहीं कर पाते हैं.  

7. इन्हें दूसरों के मुकाबले जल्दी इंफेक्शन होने का खतरा होता है.  

8. इससे पीड़ित लोगों को मसूड़ों की समस्याएं हो सकती हैं.  

9. पीड़ित पुरुषों में इरेक्टाइल डिस्फंक्शन जैसी समस्याएं हो सकती हैं.

10. ऐसे लोगों को अगर चोट लग जाए, तो जख्म भरने में काफी समय लगता है.

क्या करना चाहिए-

a. डाइट में हेल्दी चीजों को शामिल करें.

b. लाइफस्टाइल में सकारात्मक बदलाव लाएं.

c. एक्सरसाइज व योग को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं.

d. हेल्थी चीजों को खाने से परहेज करें.

e. मोटापे और बढ़ते वजन को कंट्रोल करें.

f. शराब और सिगरेट का सेवन ना करें.

g. ब्लड ग्लूकोस लेवल पर नजर रखें.

Lips Care Tips in Hindi – होंठ फटने के कारण और उसके नुस्ख़े

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सर्दी के मौसम में ज्यादातर लोगों के होंठ फटने लगते हैं, और होठों पर से सूखी त्वचा की परत निकलती है, और होठों रूखे-सूखे रहते हैं

ठंड के मौसम में शरीर के अंदर खून की गर्मी कम हो जाती है, जिसके कारण यह विकार पैदा होता है, निम्न नुस्खों का प्रयोग करने से इस विकार से छुटकारा मिलता है और होंठ मुलायम हो जाते हैं

नुस्ख़े

1. घी को जरा सा गर्म करके उसमें चुटकी भर नमक मिलाकर होठों पर मले, होठों का फटना बंद हो जाएगा.  

2. होठों पर ग्लिसरीन लगाएं, ग्लिसरीन लगाने से होंठ बहुत ही नरम हो जाते हैं.  

3. दवाइयों में काम आने वाले मोम को हथेलियों में मल कर जरा सा सेंक कर चेहरे और होठों पर मलें.

4. दूध की मलाई में नींबू का रस निचोड़ कर धीरे-धीरे मलें.  

5. होंठ फटते हो तो गर्म फुल्के (रोटी) पर लगा देसी घी फुल्के के कौर समेत गर्म गर्म ही होंठ पर लगाने से न तो न तो होंठ फटेंगे और न ही बदरंग होंगें.  

6. सेंधा नमक और घी मिलाकर दिन में कई बार लगाने से होठों का फटना बंद हो जाता है.  

7. ग्लिसरीन में नींबू निचोड़ कर लगाने से होठों का फटना ठीक हो जाता है.  

8. सर्दियों में पानी में पिपरी पीसकर लगाने से भी लाभ मिलता है.  

9. जौं का आटा पानी में घोलकर लगाने से फटे होंठ ठीक हो जाते हैं.  

10. अगर गर्मी से हॉट फटते हो तो गुलाब की पत्तियां पीसकर लगाएं, इससे आपके होठों को नमी मिलेगी.  

11. रात को सोते समय शुद्ध घी नाभि पर लगाएं, ऐसा नियमित करने से होठों पर नमी आती है और और होंठ नहीं फटते.  

12. सर्दी के दिनों में अगर होंठ पढ़ते हो, तो उन पर नियमित कोकम का तेल लगाएं, इससे होंठ नहीं फटते और वे सदैव मुलायम बने रहते हैं.  

13. होंठ हेल्दी रहे, इसके लिए पर्याप्त पानी पीना जरूरी होता है, इसके अलावा अगर आप बहुत अधिक स्मोकिंग करते हैं, तो इस कारण से होंठ काले पड़ने लगते हैं, अपनी रोजमर्रा की आदतों में सुधार करें, ताकि आपके होंठ नरम और मुलायम रहे.  

14. रात को सोने से पहले विटामिन ई और पेट्रोलियम जेली लगाने से होंठ सॉफ्ट होते हैं, और इनकी रंगत भी गुलाबी रहती है.  

15. कम से कम सप्ताह में दो बार होठों की स्क्रबिंग जरूर करें, ताकि डेड स्किन निकल जाए. होंठ की स्वस्थ त्वचा और रक्त संचार ठीक रहे, इसके लिए भी स्क्रबिंग करना ठीक रहता है.   

16. आप चाहें तो सुबह सुबह जब आप कोलगेट करें, तो अपने होठों पर 10 से 15 सेकंड तक ब्रूस घुमाए इससे होठों की डेड स्किन बाहर निकल जाती है, और उसके बाद आप इन पर पेट्रोलियम जेली लगाएं.  

17. चोकर में थोड़ा सा नारियल तेल मिलाकर होठों पर लगा ले और 15 मिनट बाद पानी से धोकर होंठ पर लिप बाम लगाएं, आपके होंठ बहुत ही मुलायम और गुलाबी रंग के हो जाएंगे.  

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Causes of Diabetes – आज ही जानें डायबिटीज के कारणों को

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आज भी अधिकांश लोगों के मन में यही धारणा है, कि ज्यादा मीठा खाने से डायबिटीज होता है, लेकिन हकीकत तो यह है कि मीठा खाने से डायबिटीज नहीं होता. मगर यह सच है कि अगर डायबिटीज के मरीज मीठा खाते हैं, तो इससे उनका शुगर लेवल अनियंत्रित हो जाता है और स्थिति गंभीर हो सकती है.

डायबिटीज को साइलेंट किलर भी कहा जाता है. जिससे कई गंभीर बीमारियां जन्म ले सकती हैं. यह एक ऐसी अवस्था है, जिसमें पीड़ित व्यक्ति का ब्लड शुगर लेवल ज्यादा बढ़ जाता है. क्योंकि शरीर में इंसुलिन का पर्याप्त उत्पादन नहीं हो पाता है. आखिर किन कारणों से होता है डायबिटीज, चलिए इस पर विस्तार से चर्चा करते हैं…

नींद की कमी – आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में काम के अत्यधिक बोझ और तनाव के कारण अधिकांश लोग अच्छी नींद से महरूम रह जाते हैं. रात में देर से सोने और सुबह जल्दी उठने की वजह से उनकी नींद पूरी नहीं हो पाती है, जो डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारी का कारण बन सकती है.

कम पानी पीना – प्रत्येक व्यक्ति को दिन भर में कम से कम 10 से 12 गिलास पानी पीना चाहिए, लेकिन जो लोग हर रोज पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पीते हैं, उनकी बॉडी डिहाइड्रेट हो सकती है, जिसके चलते ब्लड में शुगर की मात्रा बढ़ जाती है और डायबिटीज हो सकता है.

देर रात खाना – जो लोग रात में देर से खाना खाते हैं और खाते ही बिस्तर पकड़ लेते हैं, ऐसे लोगों की पाचन क्रिया बाधित होती है, और उनके शरीर का वजन बढ़ने लगता है. शरीर के बढ़ते वजन के चलते ब्लड शुगर लेवल असंतुलित हो जाता है, जो डायबिटीज का कारण बन सकता है.

मोटापा – मोटापे के शिकार लोगों को डायबिटीज की समस्या हो सकती है, अगर आपका वजन बढ़ा हुआ है. आपको हाई बीपी की शिकायत है और कोलेस्ट्रोल भी असंतुलित हैं, तो आपको डायबिटीज होने का खतरा दूसरों के मुकाबले अधिक हो सकता है.

एक्सरसाइज नहीं करना – स्वस्थ रहने के लिए हर रोज कम से कम 30 मिनट तक शारीरिक व्यायाम करना जरूरी होता है. आप चाहे तो योग, ध्यान, एक्सरसाइज या फिर जोगिंग कर सकते हैं. लेकिन अगर आप व्यायाम नहीं करते हैं, तो इससे शरीर में इंसुलिन का लेवल बढ़ सकता है, जिससे डायबिटीज होने का खतरा बढ़ जाता है.

गलत खानपान – बदलते लाइफस्टाइल की वजह से अधिकांश लोग अपने घर का बना खाना छोड़कर बाहर की तली-भुनी चीजें जंक फूड, फास्ट फूड एंड प्रोसैस्ड, आदि बड़े ही चाव से खाते हैं, इतना ही नहीं उनके डेली डाइट से पौष्टिक चीजें भी गायब हो रही है, जिसके चलते उनमें डायबिटीज होने का जोखिम तेजी से बढ़ रहा है.

ब्रेकफास्ट न करना – अगर आप ऑफिस जल्दी जाने के चक्कर में हर रोज अपना ब्रेकफास्ट स्किप करते हैं, तो आपको टाइप 2 डायबिटीज हो सकता है. दरअसल सुबह नाश्ता न करने और ज्यादा देर तक भूखे रहने से शरीर में इंसुलिन का संतुलन बिगड़ जाता है, जो डायबिटीज का कारण बन सकता है. इसलिए सुबह का नाश्ता कभी स्किप न करें.

प्लास्टिक कंटेनर का इस्तेमाल – प्लास्टिक कंटेनर में मिलने वाले खाद्य या पेय पदार्थों का सेवन डायबिटीज के खतरे को बढ़ाता है. दरअसल प्लास्टिक के कंटेनर को बनाने के लिए कुछ ऐसे केमिकल्स का प्रयोग किया जाता है, जो शरीर में इंसुलिन बनाने की क्षमता को प्रभावित करते हैं और हाइपरटेंशन को बढ़ाते हैं. इसकी वजह से डायबिटीज होने की संभावना बनी रहती है.

डेस्क जॉब करने से – अगर आप डेस्क जॉब करते हैं और लगातार एक ही जगह पर घंटों बैठे रहते हैं, तो आप में डायबिटीज होने की संभावना दूसरों के मुकाबले ज्यादा हो सकती है. डेस्क जॉब करने वाले एक ही जगह पर बैठे रहते हैं, जिससे वह ज्यादा फिजिकल एक्टिविटी नहीं कर पाते हैं और उनका बेल्ली फैट बढ़ने लगता है. अगर आपका बैली फैट भी ज्यादा है, तो सतर्क हो जाए, क्योंकि यह आपको डायबिटीज का मरीज बना सकता है.

रेड और प्रोसेस्ड मीट – अगर आप नियमित तौर पर रेड मीट या प्रोसैस्ड मीट का सेवन करते हैं, तो आप में डायबिटीज का खतरा दूसरों के मुकाबले ज्यादा हो सकता है. अमेरिकन जर्नल ऑफ क्लिनिकल न्यूट्रिशन की रिपोर्ट के मुताबिक जो लोग रोजाना बाजार में मिलने वाले  रेड मीट या प्रोसैस्ड मीट का सेवन करते हैं. उनमें इनका सेवन न करने वालों की तुलना में डायबिटीज का खतरा 20 फ़ीसदी अधिक होता है.

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Jogging Tips in Hindi – जॉगिंग के 25 स्मार्ट टिप्स अपनाएँ

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jogging

1. जो बिगिनर्स है, वह जोगिंग की शुरुआत दौड़ने के साथ नहीं बल्कि वह वॉक के साथ करें.

2. शुरुआत में अपनी क्षमता के अनुसार टाइम सेट करें और धीरे-धीरे टाइम बढ़ाएं.

3. सीधे दौड़ना शुरू न कर दें, वार्मअप एक्सरसाइज करना जरूरी है, इसके लिए कुछ मिनट पैदल चलकर शरीर को गर्म कर लें.

4. दौड़ने से पहले कुछ देर तक धीरे – धीरे चलें, फिर अपनी गति बढ़ाए.जब रुकना हो तो, एकदम से ना रुक जाएं, पहले अपनी गति को धीमा करें.

5. समतल जगह पर दौड़े, उबड़-खाबड़ जमीन पर दौड़ने से गिरने का डर रहता है!

6. अगर जोगिंग न कर पाए हो, तो उस दिन स्ट्रैंथनिंग एक्सरसाइज करें!

7. जैसे जोगिंग से पहले वार्मअप जरूरी है, उसी तरह जोगिंग के बाद रिलैक्सेशन भी जरूरी है, इसलिए शरीर की थकावट को दूर करने के लिए स्ट्रेचिंग करें!

8. अगर जोगिंग को रूटीन बना लिया है, तो प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट से भरपूर आहार लेना जरूरी है, इससे शरीर को ऊर्जा मिलती है.

9. समय पर अपने शरीर को रिलैक्स और सीधा रखें.

10. बहुत तेज ना दौड़े, इसे शरीर पर दबाव पड़ेगा और आप जल्दी थक जाएंगे.

11. हफ़्ते में 5 दिन काफी है दौड़ने के लिए, 2 दिन शरीर को आराम भी दें.

12. अगर शरीर में किसी प्रकार का दर्द है, तो पहले डॉक्टर से सलाह लें लें.

13. घर के कपड़ों में जोगिंग करना बोरिंग है, जोगिंग सूट की शॉपिंग करें जोगिंग सूट पहनने से मनोबल बढ़ता है, और दौड़ने का मन भी करता है.

14. कपड़ों की तरह ही जूतों का भी सही चुनाव करना जरूरी होता है. जोगिंग के लिए कंफर्टेबल स्पोर्ट्स शूज खरीदें, ताकि पैर और टखने पर चोट न लगे.

15. जोगिंग करते हुए हमेशा अपने साथ पानी की बोतल रखें, वह बीच-बीच में पानी पीते रहें, इससे आप डिहाइड्रेशन से बचे रहेंगे.

16. पैडोमीटर साथ रखें, इससे गति, समय, दिशा आदि की सही जानकारी मिलती है. पैडोमीटर में आप जोगिंग का रिकॉर्ड रख सकते हैं.

17. फोन पर संगीत सुनने के लिए हेडफोन भी लगा सकते हैं, पर ध्यान रहे कि वॉल्यूम बहुत ज्यादा ना हो, हमेशा अलर्ट रहें !

18. मोबाइल को अपनी बाजू पर आर्मबैंड केस कवर के जरिए बांध ले.

19. जोगिंग के वक्त पसीना बहुत आता है, इसलिए कलाई पर कॉटन बैंड जरूर पहन लें.

20. हो सके तो कंपनी के लिए अपने किसी दोस्त को साथ ले ले.

21. दौड़ते समय कभी भी बातचीत नहीं करें और नाक से सांस ले.

22. जोगिंग के 1 घंटे बाद स्नान अवश्य करें, इससे शरीर की थकावट दूर होती है.

23. जोगिंग करने का सुबह का टाइम बहुत अच्छा होता है, अगर सुबह टाइम नहीं मिलता, तो आप शाम को आधा घंटा निकाल सकते हैं. 

24. जोगिंग शरीर के लिए बहुत ही आवश्यक है, इससे व्यक्ति मेंटली और फिजिकली फिट रहता है, जोगिंग को अपनी डेली रूटीन बनाएं.

25. जोगिंग से पहले आपका पेट खाली होना चाहिए, अगर आपका पेट भरा है, तो कृपया करके आप जोगिंग ना करें, इसके लिए आप 1-2 किलोमीटर पैदल चल सकते हैं.

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Swine Flu Treatment – स्वाइन फ्लू से कैसे बचें अपनायें 5 तरीके

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swine flu

रहें सावधान:   सर्दियों के दिनों में किसी भी प्रकार की शारीरिक समस्या पर शुरू होते ही ध्यान दें, उपचार शुरू करने के लिए उसके और बिगड़ने का इंतजार ना करें, भले ही आपको केवल खांसी जुखाम हुआ हो, उसका वक्त रहते उपचार करने से वह बढ़ता नहीं है, और ना ही आपको अधिक परेशान होना पड़ता है. 

1. हाथ साफ रखें: अपने हाथों को नियम से धोने से कई बीमारी फैलाने वाले जीवाणुओं से बच सकते हैं, इसके लिए हाथ 20 सेकेंड तक धोने जरूरी हैं ऐसा करने से आप अधिकतर वायरस और बैक्टीरिया से सुरक्षित रह सकते हैं. यूनाइटेड किंगडम की रॉयल फार्मास्यूटिकल सोसाइटी का कहना है कि 20 सेकंड तक हाथ धोना एकमात्र निश्चित तरीका है जिससे सर्दी, फ्लू, संक्रमण तथा पेट खराब करने वाले जीवाणुओं से बचा जा सकता है.

हाथ साबुन से धोएं तब ऐसा करना और भी जरूरी है यदि आप पहले से किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए हो जो जुखाम खांसी आदि से पीड़ित हो साथ ही सार्वजनिक शौचालय जाने के बाद और खाने से पहले भी हाथों को अच्छे से धोएं.

2. टिशूज का करें इस्तेमाल: बाहर जाएं तो अपने साथ कुछ टिशूज अवश्य रखें छींकते या खास्तें वक्त टिशूज का उपयोग करें और तुरंत उसे कूड़ेदान में फेंक दें. रोगाणु कई घंटों तक जीवित रह सकते हैं इसलिए टिशूज को फेंकने का मतलब है कि वे किसी अन्य को भी बीमार नहीं करेंगे इससे एक कदम आपका स्वच्छता की ओर बढ़ जाएगा. टिशूज की जगह अगर रुमाल या तोलिया यूज करोगे तो फ्लू के जीवाणु उस रूमाल या तोलिए के साथ ही रह जाएंगे, इसलिए हमेशा टिशूज का प्रयोग करें फ्लू के समय.

3. डॉक्टर की सलाह है जरूरी: यदि आपका गला खराब है तो डॉक्टर की सलाह लें. गला खराब होने के 10 में से 9 मामलों में वायरल इंफेक्शन हो सकता है, जिसका एंटीबायोटिक दवाइयों से उपचार नहीं हो सकता है. यूंही एंटीबायोटिक्स के उपयोग से इनके प्रति प्रतिरोधकता बढ़ रही है जो एक वैश्विक खतरा बन चुका है क्योंकि एंटीबायोटिक्स का बगैर सोचे समझे उपयोग करने से अगली बार वे बेअसर हो सकते हैं. कुछ भी दवाइयां बिना डॉक्टर की सलाह के नहीं लेनी चाहिए.

4.सावधानी से करें दवाओ का सेवन: एंटीबायोटिक दवाएं तभी लें यदि उनकी सलाह डॉक्टर ने दी हो. खुद उनकी सलाह किसी को ना दें या बाद में उपयोग के लिए उन्हें बचाकर न रखें एंटीबायोटिक दवाओं की पूरी खुराक न लेना तथा वक्त से पहले उनका सेवन बंद करने से एंटीबायोटिक प्रतिरोधकता विकसित होती है जिससे अगली बार बैक्टीरिया पर वह दवा असर नहीं करती है इसलिए जरूरी है कि जितने दिन डॉक्टर ने दवा का सेवन करने को कहा हो उससे पहले उसे बंद ना करें फिर चाहे आपको सेहत ठीक क्यों ने महसूस होने लगी हो.

5. ठंड से बचना चाहिए: सर्दियों के मौसम में ठंड से बचना तथा गर्म रहना जरूरी है फिर चाहे आप घर में हो या बाहर, ठंड से दूर रहने से जुकाम, फ़्लू तथा अधिक गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को रोकने में मदद मिलती है. ठंड से बचने के लिए घर को गर्म रखें और गर्म कपड़े पहन कर रखें. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 18 डिग्री तापमान सामान्य स्वस्थ वयस्कों के लिए उपयुक्त है. स्वास समस्याओं या एलर्जी वालों के लिए तापमान 16 डिग्री से कम नहीं होना चाहिए और बीमार विकलांग तथा बुजुर्गों के लिए तापमान कम से कम 21 डिग्री सेंटीग्रेड होना चाहिए. ठंड से बचने के लिए अच्छे कपड़े पहने जिससे कि आपका शरीर का तापमान बना रहे.   

तो ऊपर दी गयी बातों का आप ध्यान रखें और आने वाले सर्दी के मौसम में जितना हो सके ठंड से बचें और सावधान रहें. अगर इस मौसम में अगर आप बीमार होते हैं तो साथ में आप अपने परिवार और दोस्तों को भी इस बीमारी में घेर लेते हैं . इसलिए आप थोड़ी सी बातों को ध्यान में रखकर इस बहुत बड़ी बीमारी से बच सकते हैं इसलिए ख्याल रखें, खुश रहे.

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विटामिन सी के स्रोत और उसके लाभ – Vitamin C Foods and Benefits – Varmajitips

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vitamin c food

क्‍यों जरुरी है विटामिन सी?

विटामिन-सी को एस्कोर्बिक एसिड भी कहा जाता है। यह कोलाजैन नामक कनैक्टिव टिश्यू के रख-रखाव में जरूरी होता है जो शरीर की कोशिकाओं को एक साथ जोड़े रखता है। विटामिन-सी एक महत्वपूर्ण एंटीआक्सीडैंट है जो हृदय रोगों, कुछ निश्चित प्रकार के कैंसरों तथा एजिंग जैसी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के खतरे को कम करने से जुड़ा है।

विटामिन-सी जख्मों तथा शरीर के जले हिस्सों के इलाज में काफी सहायक होता है, साथ ही यह दांतों तथा हड्डियों के निर्माण में सहायक होता है। यह कैपिलरीज तथा रक्तवाहिनियों की दीवारों को ताकतवर बनाता है। यह आयरन की खपत को भी बढ़ाता है। अध्ययनों से यह सामने आया है कि विटामिन-सी आम जुकाम की गंभीरता को कम कर सकता है। आइए जानें कि गर्मियों में हम इसे अपनी डाइट में कैसे शामिल कर सकते हैं

स्रोत : खाद्यों में विटामिन-सी की मात्रा निर्भर करती है-

1. उगने की स्थितियों पर

2. परिपक्वता की स्थिति

3. क्षेत्रीय विभिन्नताएं तथा

4. मौसम।

विटामिन-सी के मुख्य स्रोतों में हरी सब्जियां, फल तथा ताजा आलू शामिल हैं। अमरूद (पेरू या जमरूख) में विटामिन-सी की उच्च मात्रा पाई जाती है (प्रत्येक 100 ग्राम में 212 मिलीग्राम)।  सूखी अवस्था में दानेदार खाद्यों तथा दालों में विटामिन-सी नहीं पाया जाता परंतु यदि इन्हें 8 घंटे तक पानी में भिगो कर रखा जाए और अंकुरित होने दिया जाए तो ये विटामिन-सी का अच्छा स्रोत बनती हैं।

खपत : एस्कोर्बिक एसिड की खपत आंतडिय़ों के माध्यम से होती है। सिंथैटिक एस्कोर्बिक एसिड के मुकाबले बायोफ्लेवनॉयड्स युक्त प्राकृतिक सिट्रस जूस की खपत धीरे-धीरे परंतु बढिय़ा तरीके से होती है।

नष्ट होना : सब्जियों की कोशिकाओं में एस्कोर्बिक ऑक्सीडेस नामक एक एन्जाइम होता है। जब सब्जियां बढिय़ा ढंग से काटी जाती हैं तो एन्जाइम प्रवाहित होते हैं और अधिक विटामिन-सी नष्ट होता है। एन्जाइम की ऑक्सीडेशन की दर तापमान के बढऩे के साथ बढ़ती है और इस तरह सब्जियों का ग्रेडिड तापमान विटामिन-सी को नष्ट करता है। एस्कोर्बिक ऑक्सीडेस उबालने पर भी नष्ट होता है। यदि सब्जियों को एकदम उबलते पानी में डाला जाए तो एन्जाइम एकदम नष्ट होते हैं और इस तरह विटामिन-सी का कोई नुक्सान नहीं होता।

संतरा लाभ के लिए

  • यह विटामिन-सी का बहुत शानदार स्रोत है।
  • यह फोलेट, थायामाइनड तथा पोटाशियम का भी अच्छा स्रोत है। एक मध्यम आकार का संतरा महिलाओं के लिए 70 मि.ग्रा. यानी रिकोमैंडिड डाइट्री अलाऊंस (आर.डी.ए.) का  90 प्रतिशत से भी अधिक उपलब्ध करवाता है। संतरों में कैलोरीज कम होती हैं। एक संतरे में लगभग 60 कैलोरीज होती है।
  • संतरे के मैंब्रेन्स पैक्टिन नामक एक घुलनशील डाइट्री फाइबर उपलब्ध करवाते हैं जो हमारे रक्त में कोलैस्ट्रोल के स्तर को नियंत्रण में रखने में सहायक होता है।

नींबू लाभ के लिए

  • यह भी विटामिन-सी का एक शानदार स्रोत है।
  • इससे मुंह सूखने की समस्या से राहत मिलती है और साथ ही यह मछली से लेकर सब्जियों तक तथा चाय तक का स्वाद बढ़ाने में बहुत बढिय़ा साबित होता है। सिट्रस फलों में नींबू का सर्वाधिक प्रयोग किया जाता है। नींबू के एक कप जूस में लगभग 55 मिलीग्राम विटामिन-सी होता है. यानी एक व्यस्क औरत के लिए आर.डी.ए. का 70 प्रतिशत से भी अधिक।
  • नींबू में एक एंटीआक्सीडैंट कैमिकल भी होता है जो हमारी नाडिय़ों तथा कैपिलरीज की दीवारों को ताकतवर बनाने में सहायक होता है।

स्टार फ्रूट लाभ के लिए

  • 100 ग्राम स्टार फ्रूट 31 कैलोरीज  उपलब्ध करवाता है जो किसी भी अन्य फल के मुकाबले बहुत कम है।
  • इसके साथ ही इसमें आवश्यक पोषक तत्व, एंटीआक्सीडैंट्स तथा स्वास्थ्य के लिए जरूरी विटामिन्स भी होते हैं।
  • यह फल अपने छिलके के साथ डाइट्री फाइबर की एक अच्छी मात्रा उपलब्ध करवाता है। यह फाइबर डाइट्री एल.डी.एल.कोलैस्ट्रोल की खपत को रोकने में सहायक होता है। इसके साथ ही डाइट्री फाइबर्स कोलोन के म्यूकस मैंब्रेन की रक्षा करने में भी सहायक होते हैं।
  • यह फल हैंगओवर तथा घमौरियों के इलाज के लिए भी प्रसिद्ध है। यूरिक एसिड तथा किडनी फेल्योर से पीड़ित व्यक्तियों को स्टार फ्रूट का सेवन नहीं करना चाहिए।

रैस्पबेरीज लाभ के लिए

  • इनमें फोलेट, आयरन तथा पोटाशियम की लाभदायक मात्रा मौजूद होती है।
  • यह बायोफ्लेवनॉयड्स उपलब्ध करवाते हैं जो हमारी कैंसर से रक्षा करते हैं। एक कप रैस्पबेरीज में 60 कैलोरीज तथा विटामिन-सी की 30 मिलीग्राम मात्रा मौजूद होती है।
  • इसके बीज न घुलने वाला फाइबर उपलब्ध करवाते हैं जो कब्ज को रोकने में सहायक होता है।

क्रैनबेरीज लाभ के लिए

  • यह विटामिन-सी तथा फाइबर का बढिय़ा स्रोत है।
  • इनका जूस सिसटाइटिस तथा यूरीनरी ट्रैक्ट इनफैक्शन्स को रोकने में सहायक होता है। इनमें बायोफलेवनोयड्स मौजूद होते हैं जो हमारी नजर की रक्षा करने के साथ ही कैंसर से भी रोकथाम करते हैं।

ग्रेप फ्रूट नारंगी लाभ के लिए

  • यह विटामिन-सी तथा पोटाशियम का बढिय़ा स्रोत है।
  • इनमें बीटा कैरोटीन तथा लाइकोपीन नामक शक्तिशाली एंटीआक्सीडैंट्स मौजूद होते हैं।
  • इनमें कैलोरीज कम होती है।
  • इनमें मौजूद बायोफलेवनोयड्स कैंसर से हमारी रक्षा करते हैं।
  • मीठे से रहित एक कप ग्रेप फ्रूट में 95 मिलीग्राम विटामिन-सी यानी आर.डी.ए. के 100 प्रतिशत से भी अधिक मौजूद होता है। इसके साथ ही इसमें 175 मिलीग्राम पोटाशियम  तथा एक मिलीग्राम आयरन भी होता है। ग्रेप फ्रूट वजन घटाने वाली डाइट में शामिल किया जाने वाला एक अच्छा खाद्य है।

अमरूद लाभ के लिए

  • यह विटामिन-सी का बढिय़ा स्रोत है।
  • इनमें घुलनशील डाइट्री फाइबर तथा पैकटिन की उच्च मात्रा मौजूद होती है।
  • इनमें पोटाशियम तथा आयरन भी मौजूद होता है।

कीवी लाभ के लिए

  • यह पोटाशियम तथा फाइबर का अच्छा स्रोत है।
  • एक बड़ा कीवी 80 मिलीग्राम विटामिन-सी उपलब्ध करवाता है। कीवी में फाइटो कैमिकल्स भरपूर मात्रा में होते हैं। इसके साथ यह एक घुलनशील फाइबर भी उपलब्ध करवाते हैं जो रक्त में कोलैस्ट्रोल के स्तरों को नियंत्रित रखने में सहायक होते हैं। 115 ग्राम कीवी में मात्रा 70 कैलोरीज होती है।

सबसे ज्यादा विटामिन सी वाले खाद्य पदार्थ –

  • आंवला
  • संतरा 
  • ब्रोकोली
  • शिमला मिर्च
  • स्ट्रॉबेरी
  • अन्नानास