Money Dreams Meaning – पैसो की बारिश होने वाली है अगर सपने में दिखे – Varmajitips

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स्वप्न शास्त्र के अनुसार सपने आने वाले समय के बारे में शुभ-अशुभ घटनाओं का पूर्व संकेत देते हैं। सपने में जहां कुछ चीजों को देखना शुभ माना जाता है।

वहीं कुछ ऐसे सपने होते हैं जिसका संकेत बेदह अशुभ माना जाता है।

सपने में पैसा देखना एक ऐसा स्वप्न होता है जिसका संकेत शुभ माना गया है। ऐसा सपना स्पष्ट रूप से धन लाभ की ओर संकेत देता है।

भोपाल शहर के पंडित जगदीश शर्मा बताते हैं कि हर सपना एक संकेत देता है।

इसलिए अगर आप इन चीजों को सपने में देखते हैं तो समझ लीजिए कि आपका भाग्य बदलने वाला है…

सपने में पैसे देखना

ज्योतिष शास्त्र में भी इस सपने को शुभ माना गया है। ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति सपने में पैसे देखता है। वह आने वाले समय में धन से परिपूर्ण होने वाला है।

साथ ही यदि आप सपने में दूसरों से पैसा लेते देखते हैं तो यह इस बात का संकेतक है कि आने वाले समय में आपको निश्चित तौर पर धन लाभ होने वाला है।

इसके अलावे सपने में यदि आप ऐसा देखते हैं तो इसका अर्थ है कि कहीं से भी आपको बहुत सारा पैसा मिलने वाला है।

कमल का फूल दिखना

ज्योतिष के मुताबिक अगर आप सपने में कमल का फूल देखते हैं तो आपको कुछ ही दिनों में धन लाभ होने वाला है।

देवी-देवाताओं के दर्शन

सपने में देवी-देवाताओं के दर्शन हो जाए तो ये इस बात का संकेत है कि आनेवाले दिनों में आपको अपने कार्यों में सफलता मिलेगी और किसी माध्यम के जरिए आपको धनलाभ भी होगा।

गाय को देखना

ज्योतिष के अनुसार सपने में गाय को देखना बहुत ही शुभ संकेत है। यह सपना इस बात की ओर इशारा करता है कि आपको जल्द ही धन, सम्मान मिलने वाला है।

हाथी का दिखना

सपने में हाथी देखना बहुत ही शुभ माना जाता है। ज्योतिषों की मानें तो सपने में हाथी देखने का मतलब है कि आपको किसी माध्यम से खूब पैसा मिलनेवाला है।

श्रीफल दिखना

सपने में मोर, श्रीफल, फूल या फूलों की माला देखना भी धन लाभ का शुभ संकेत कहा जाता है।

शंख दिखना

सपने के अंदर आपको शंख और मंदिर की घंटियों की आवाज आए तो भी यह इस बात को दर्शाता है कि आपके पास धन प्राप्ति होने वाली है।

डांस करते दिखना

अगर आप सपने में किसी महिला या लड़की को डांस करते हुए देख लें तो ‘योतिष कहते हैं कि आपको कहीं से धन की प्राप्ति होने वाली है।

सफेद घोड़ा

अगर आप सपने में सफेद घोड़ा देख लिया है तो समझ लें आपका भाग्यशाली हैं और आपके लिए संपत्ति का रास्ता खुल गया है।

महल दिखना

ज्योतिषों की मानें तो सपने में महल देखने का मतलब भी होता है कि आपको कहीं से पैसा मिलने वाला है।

What is Iron and its benefits – आयरन का परिचय, महत्त्व, लक्षण, इलाज़ और इसकी कमी से होने वाले रोग

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परिचय-

लाल रक्त कोशिकाओं को खून में हीमोग्लोबिन बनाने के लिए लोहे की आवश्यकता रहती है। फेफड़ों से शरीर की कोशिकाओं और ऊतकों तक ऑक्सीजन ले जाने के लिए भी इसकी आवश्यकता होती है। शरीर का कुछ लोहा जिगर और तिल्ली में जमा हो जाता है। विटामिन `बी´ के चयापचय के लिए भी लोहे की आवश्यकता होती है।

लिंग और शरीर की क्रियात्मक स्थिति के अनुसार दैनिक आहार में केवल 2-4 mg लोहे की आवश्यकता होती है। शरीर के संस्थान अनाजों में समाये हुए लोहे का केवल 5 से 10 प्रतिशत ही सोख सकते हैं।

हरी पत्तेदार सब्जियों में लोहे का प्रतिशत बहुत अधिक होता है। आहार की मिश्रित संरचना पर भी सोख प्रतिशत निर्भर होता है। इन्हीं कारणों से लोहे की दैनिक आवश्यकता 12-24 मिलीग्राम के बीच रखी गई है।

लोहे की कमी से उत्पन्न एनीमिया (खून की कमी) को ठीक करने के लिए आहार में इसकी बहुत अधिक आवश्यकता होती है। ऐसी स्थितियों में लौह सम्पूरकों या लोहे की पुष्टिकृत आहारों का आश्रय लिया जा सकता है।

जन्म पर बच्चे के पास केवल चार महीने के लोहे की आपूर्ति होती है। लोहे की थोड़ी सी कमी भी इसके बौद्धिक विकास को कम कर सकती है।

मासिकस्राव और गर्भावस्था के समय महिलाओं में लोहे की कमी हो जाती है। कठोर व्यायाम से भी शरीर में लोहे की कमी होती है। कुछ आहार शरीर द्वारा अन्य आहारों से प्राप्त लोहे का उपयोग रोक देते हैं। लोहे की कमी शरीर में श्वासहीनता, थकावट और कमजोरी उत्पन्न कर सकती है। इसकी अधिकता विषाक्तता उत्पन्न कर सकती है।

लोहे के महत्वपूर्ण स्रोत-

हरी पत्तेदार सब्जियां, मटर फलियां, किशमिश, अखरोट, नाशपाती, सम्पूर्ण अनाज, मूंग, मसूर, चोकर, बीज, सोयाबीन, मछली, जिगर, मुर्गा, गुर्दे और अण्डे की जर्दी।

आयरन की कमी से होने वाले रोग इस प्रकार हैं –

आयरन की कमी से एनीमिया होना एक सबसे बड़ा कारण होता है। आयरन डेफिशियेंसी या तो शरीर में आयरन के कम अवशोषण होने या शरीर में आयरन की खपत कम लेने के कारण होती है। आयरन की कमी से थकान, एनीमिया, बचपन के दौरान कम बौद्विक विकास, शरीर का अनियंत्रित तापमान, इम्म्यून सिस्टम का कमजोर होना, बालों एवं त्वचा के रोग होना, सिरदर्द, शरीर का विकास न होना, कमजोरी, आदि रोगों का सामना करना पड़ता है।

इसलिए आप शरीर में आयरन की कमी न होने दें। हमने आयरन की पूर्ति वाले खाद्य पदार्थ इस आर्टिकल में बता दिए है। आप उनका सेवन करके आयरन की कमी को दूर कर सकते हैं।

एनीमिया – शरीर में खून की कमी होना एनीमिया होता है। हमारे शरीर में हिमोग्लोबिन एक ऐसा तत्व है जो शरीर में खून की मात्रा बताता है। पुरुषों में इसकी मात्रा 12 से 16 प्रतिशत तथा महिलाओं में 11 से 14 के बीच होना चाहिए। यह तब होता है, जब शरीर के रक्त में लाल कणों या कोशिकाओं के नष्ट होने की दर, उनके निर्माण की दर से अधिक होती है। एनीमिया से बचने के लिए हमे पर्याप्त मात्रा में आयरन युक्त भोजन का सेवन करना चाहिए।

आयरन की कमी से निम्नलिखित रोग हो जाते हैं –

1. थकान – आयरन डेफिशियेंसी के कारण हमारे शरीर को हीमोग्लोबिन बनाने में परेशानी होती है, जो लाल रक्त कोशिकाओं से आयरन अवशोषित करता है। हीमोग्लोबिन शरीर के चारों ओर ऑक्सीजन ले जाने में मदद करता है और शरीर में ऊर्जा का स्तोत्र होता हैं। जब शरीर में पर्याप्त हीमोग्लोबिन नहीं होता है तो ऊत्तकों और मांसपेशियों तक कम ऑक्सीजन पहुंच पाती है जिससे शरीर में ऊर्जा की कमी रहती है। इसलिए आयरन की कमी के कारन हमें शारीरिक थकान और कमजोरी  महसूस होती है।

2. श्वसन सम्बन्धी बीमारियां – हीमोग्लोबिन हमारे शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं को शरीर के चारों ओर ऑक्सीजन ले जाने का काम करता है। जब आयरन डेफिशियेंसी के दौरान हीमोग्लोबिन शरीर में कम होता है तो ऑक्सीजन का स्तर भी कम होता है। ऐसे में मांसपेशियों को सामान्य गतिविधियों को करने के लिए पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और श्वास की दर में वृद्धि हो जाती है। यानि की सांस फूलने लगता है। इसी कारण सांस की तकलीफ आयरन की कमी वाले लोगों में एक आम लक्षण होता है।

3. दिल की बीमारी – आयरन की कमी वाले लोगों में ऑक्सीजन अच्छे से दिल तक नहीं पहुंच पाता इस कारण दिल को ज्यादा काम करना पड़ता है जिससे दिल की बीमारी यानि हार्ट अटैक की ज्यादा समस्या रहती है। इसलिए दिल के मरीजों को आयरन पर्याप्त मात्रा में लेना चाहिए।

4. सिरदर्द और चक्कर आना – आयरन की कमी से आम तौर पर सिरदर्द और चक्कर आना जैसी समस्याएँ रहती हैं क्यों की हीमोग्लोबिन की कमी का मतलब है कि पर्याप्त ऑक्सीजन का मस्तिष्क तक ना पहुंच पाना और जिसके कारण रक्त वाहिकाओं में सूजन और दबाव पैदा होता है जो सिरदर्द का कारण बनता हैं।

5. सूजन – आयरन की कमी से कभी कभी आपके मुंह के अंदर या उसके आस-पास सूजन आ जाती हैं, जिससे मुंह के अल्सर, मुंह में शुष्कपन गले में लाल दरारें हो सकती हैं। इसकी कमी से आपकी जीभ भी सूज सकती हैं। जब आपकी जीभ में सूजन हो जाती है या वो पीला या अजीब चिकनी सी होती है। आयरन की कमी से आँखों की समस्याएँ भी बढ़ जाती हैं।

6. त्वचा और बाल – आयरन की कमी से त्वचा शुष्क और बेजान हो जाती है इसके अलावा सर के बाल कमजोर और गंजापन की समस्याँ भी हो जाती है। क्यों की आयरन की कमी के कारन त्वचा और सिर में ब्लड का सर्कुलेशन काम हो जाता है।

आरडीएक्स का पूरा नाम क्या है, ये कैसे बनता है – What is RDX

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rdx kya h

इसका पूरा नाम है रिसर्च डिपार्टमेंट एक्सप्लोसिव।

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आमतौर पर नए विस्फोटों को कोई पहचान संख्या दी जाती है, लेकिन इसे नहीं दी गई बल्कि इसके आगे अंग्रेजी का अक्षर एक्स लगा दिया।

इसका वैज्ञानिक नाम है – साइक्लोट्रिमैथिलीन ट्रिनट्रेमाइन।

इस विस्फोटक का इस्तेमाल सेना द्वारा किया जाता है।

दूसरे विश्व युद्ध में इसका व्यापक प्रयोग किया गया था।

आरडीएक्स एक रंगहीन ठोस पदार्थ है जो हैक्सामाइन पर सघन नाइट्रिक एसिड डालकर बनाया जाता है।

इसकी खोज 1890 के दशक में हांस हैनिंग नाम के जर्मन ने की थी. लेकिन एक विस्फोटक के रूप में इसे 1920 के दशक में तैयार किया गया।

नोट: उपरोक्त दी गयी पोस्ट सिर्फ जानकारी के मक़सद से पब्लिश की गयी है इसके अलावा इस पोस्ट से और कोई संबंद नहीं है।

गर्मियों में स्किन की देखभाल के लिए 9 टिप्स – Summer Skin Care Tips

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summer skin care tips

1. गर्मियों में खूब सारा पानी पीने, हल्का और पोषक खाना खाने की सलाह दी जाती है। अपनी त्वचा को हाइड्रेट रखने के लिए ताजे फल व हरी सब्जियां खाएं।

2. अपने खाने में खीरा, ककड़ी, करेला, पालक, तरबूज, संतरा, चेरी, प्लम और लीची जैसी सब्जियों और फलों को शामिल करें।
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3. दिन में कम से कम दो बार फेस वॉश करें।

4. बहुत जरूरी न हो तो दोपहर के समय घर से बाहर न निकलें।

5. चेहरे पर टमाटर का पेस्ट लगाने से भी गर्मी में झुलसी त्वचा को काफी स्कून मिलता है।

6. गर्मियों में त्वचा पर सनबर्न के नुकसान को कम करने के लिए चेहरे को बार-बार ताजे, साफ और ठंडे पानी से धोएं। चेहरे को धोने के बाद इसे तौलिए से पोंछने की बजाय अपने आप सूखने दें, जिससे चेहरे में ठंडक बनी रहेगीं।

7. अपनी वॉर्डरोब की तरह अपने स्किन केयर प्रोडक्ट भी बदलें। बदलते मौसम को ध्यान में रखते हुए अपने चेहरे के लिए हल्के और फलों के गुणों वाले या नेचुरल उत्पादों का ही प्रयोग करें। 

8. स्किन को प्रोटेक्ट करने के लिए टोनर का इस्तेमाल जरूर करें। रात में सोते समय टोनर लगाएं।

9. गुलाब जल में तरबूज का रस मिलाकर चेहरे पर लगाने के 20 मिनट बाद ताजे पानी से धो डालें. इससे सनबर्न का असर खत्म हो जाएगा।

गहनों के देखभाल के 20 आसान उपायें हिंदी में यहाँ जानें – Jewellery Care Tips in Hindi

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jewellery care tips

1. सोने के गहने हर पीस को अलग-अलग मलमल के कपड़े में लपेट कर रखें।  

2. प्लेटिनम ज्वैलरी को अमोनिया से साफ करें।  

3. प्लेटिनम ज्वैलरी को ज्यादा देर तक साबुन के पानी में ना रखें।  

4. हीरे के गहनों को खास ज्वैलरी बॉक्स में बहुत सहेजकर रखें। हीरे के गहनों को अमोनिया और पानी मिलाकर साफ करें।  

5. मोती के गहनों को मुलायम कपड़े से साफ करें और इन्हें एयरटाइट डिब्बे में रखें।  

6. सिल्वर ज्वैलरी, यानी चांदी के गहनों को हानिकारक केमिकल से दूर रखें। वरना इनकी चमक फीकी पड़ जाएगी।  

7. चांदी के मैले गहनों को कुनकुने पानी में डालें। फिर सॉफ्ट टूथब्रश पर सफेद टूथपेस्ट लगाकर ज्वेलरी पर धीरे-धीरे स्क्रब करें। फिर से गर्म पानी में धोएं। चमक लौट आएगी।  

8. कुंदन ज्वैलरी की चमक बरकरार रखने के लिए उसे स्पॉन्ज या कॉटन लगे बॉक्स में रखें।  

9. ज्वैलरी रखने के लिए ज्वैलरी बॉक्स का इस्तेमाल करें। हर आइटम ज्वैलरी बॉक्स के अलग-अलग पार्ट्स में रखें, ताकि वह आपस में उलझने न पाएं।  

10. गहनों की सफाई करने के लिए पानी में माइल्ड डिटर्जेट पाउडर मिला लें। इसमें ज्वैलरी डालकर छोटे सॉफ्ट ब्रश से साफ करें। ब्रश से साफ करने के बाद ज्वैलरी को सॉफ्ट कपड़े से पोंछें।  

11. गहनों को केमिकल से बचाने के लिए मेकअप, बॉडी लोशन, परफ्यूम आदि लगा लेने के बाद ही पहनें।  

12. खाना बनाते समय, बर्तन धोते समय, एक्सरसाइज करते समय,स्विमिंग करते समय नाजुक गहने न पहनें, वरना यह टूट सकते हैं।  

13. महंगे आभूषण हो या फैशन ज्वैलरी, अगर इन्हें ज्यादा समय तक इस्तेमाल में लाना है तो इनकी सही देखभाल करनी जरूरी होती है।   फैशन ज्वैलरी को भी रोज नहीं पहनें और एसिड, अल्कोहल, विनेगर या अमोनिया वाले क्लीनर से इन्हें साफ न करें।  

14. पीतल, तांबा या ब्रॉन्ज के आभूषण ऑक्सीडाइज होकर अपनी असली रंगत खो देते हैं, इसलिए क्रीम, परफ्यूम आदि लगाने से पहले आभूषण उतारना न भूलें।  

15. अपनी फैशन ज्वैलरी को रोज नहीं पहनें। यह रोज पहनने के लिए नहीं होती। अगर आप इन्हें रोज पहनती है तो इनकी रंगत और चमक में बदलाव आ सकता है।  

16. फैशन ज्वैलरी को लंबे समय तक टिकाऊ बनाए रखने के लिए हर बार इस्तेमाल के बाद इसे साफ करना न भूलें। इसके लिए इन्हें मुलायम कपड़े से साफ करें। पसीने, गंदगी से आभूषण का रंग फीका पड़ जाता है।      

17. अमोनिया, एल्कोहल, विनेगर या एसिड युक्त क्लीनर से इन्हें साफ न करें, अन्यथा आपके आभूषणों को बहुत नुकसान पहुंच सकता है।  

18. अपनी फैशन ज्वैलरी को सावधानी से कॉटन, बटर पेपर, वेलवेट बॉक्स या जिप लॉक बैग में रखें। फैशन नेकलेस स्कोर वर्टिकल (लंबवत) रूप से लटकाकर रखें।  

19. आभूषणों को अलग-अलग रखें, ताकि वे उलझे नहीं।  

20. ज्वैलरी कलेक्शन में अगर आप थोड़ा बदलाव चाहती हैं तो हैंड मेड व पेंट की हुई रजिया कुंज की ज्वैलरी को चुने, जो स्टाइलिश भी है और ट्रेंडी भी।

एक माँ के लिए अपने शिशु की देखभाल के कुछ टिप्स हिंदी में – Baby Care (Neonatal) for Mother in Hindi

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स्नेह का बंधन मां और बच्चे का रिश्ता होता है आज इस पोस्ट के माध्यम से हम आपको कुछ ऐसे टिप्स बता रहें है जिससे आप मोटीवेट तो होंगी ही, साथ ही आप इन टिप्स को पढ़ कर अपने बेबी का अच्छे से ध्यान रख सकते हैं।

वैसे तो मां और बच्चे के बीच की भाषा दुनिया की इतनी जादुई भाषा होती है, जिसे समझने के लिए शब्दों की कोई जरूरत नहीं होती। फिर भी कुछ उपयोगी टिप्स इसी बारे में।

आपकी नजरों में सबसे खूबसूरत रिश्ता कौन सा है? अगर यह सवाल मैं आपसे पूछूं तो आप सब बिना सोचे एकदम जवाब देंगे- मां और बच्चे का रिश्ता. जी हां! जीवन का सबसे खूबसूरत व सबसे अनमोल रिश्ता यही है! बिना किसी स्वार्थ भावना के एक मां हर दिन सिर्फ अपने बच्चे का विकास, उसके स्वास्थ्य और उसके पोषण के लिए ही सोचती है। उससे उनका आपसी संबंध नियंत्र विकसित और मजबूत होता ।

हालांकि यह जरूरी नहीं कि मां और बच्चे के बीच हर सवाद आई लव यू से शुरू हो और आई लव यू पर खत्म हो। वैसे भी जब तक बच्चा बोलने लायक नहीं होता, तब तक वह संकेतिक हाव-भावं से ही, हर पल यह एहसास कराता है कि वह आपसे बहुत प्यार करता है। आइए जानते हैं, कैसे-

मां का दूध

शायद आपको थोड़ा अटपटा लगे लेकिन यह हकीकत है। मां के दूध की महक बच्चे को अपनी और आकर्षित करती है। तभी तो बच्चा भीड़ में भी अपनी मां की गोद को पहचान लेता है। जन्म लेने के बाद से जब तक बच्चा बोलना नहीं सीखता, मां बच्चे के इशारों के जरिए उसकी जरूरतों को पहचाना शुरु कर देती है। बच्चे की शुरुआती जरूरतों को पूरा करने की क्षमता, स्त्रेहपूण स्पर्श और वे सब क्रियाएं, जो इनकी एक-दूसरे के साथ जुड़ी हुई हैं, यह मां-बच्चे के बीच के बंधन को मजबूती प्रदान करती हैं।

फिर बचपन में कदम

कहते हैं शिशु के जन्म के साथ ही मां का भी नया जन्म होता है। जी हां, मां और बच्चे के बीच इस अनोखे प्यार भरे रिश्ते में, मां का सहज रूप से तरह-तरह के चेहरे बनाने पर बच्चे की मुस्कुराहट और अपने चंचल हावभाव के साथ अपनी भाषा में जवाब देना भी शामिल है। ये एक ऐसी पारस्परिक क्रिया है, जो मां और बच्चे के रिश्ते को बढ़ावा देने में मदद करती है और ये स्त्रेह का बंधन मजबूत होता है।

आपसी चुंबन

छोटे बच्चे अक्सर हल्के से चुंबन के साथ अपने प्यार का अहसास कराते हैं और मां के प्रति अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हैं। जब वे बिना दांत वाले मुंह से आपकी त्वचा को चूमते हैं तो उनका प्यार भरा स्पर्श आपका दिल जीत लेता है। शारीरिक रूप से बच्चों का यह सरल अंदाज सबसे पहले अपनी मां के सामने ही प्यार को अभिव्यक्त करता है।

टकटकी लगाना

जी हां, टकटकी लगाता बच्चा किस को मोहक नहीं लगता? ये बच्चों का काफी प्यारा तरीका है। वह भी जानता है कि इस अंदाज से किसी को बुरा नहीं लगेगा। आपको टकटकी लगाकर देख कर वह आपका चेहरा पढ़ता है और आपको रिझाने का प्रयास करता है। जब वह आपको टकटकी लगाए देख रहा हो तो उससे दूर ना जाएं या अपने कामों में उलझे नहीं, बस मुस्कुराइए।

चोट की ओर इशारा

भले ही बच्चे को जरा-सी खरोंच भी ना लगी हो, लेकिन उसका आपके पास आकर चोट की तरफ इशारा करना और आप को चूमने के लिए कहना दर्शाता है, उसका प्यार और चाह कि उसकी मां का हर हाल में, हर स्थिति में उसकी देखभाल करें।

बच्चे का रोना

यह भी बच्चे के प्यार जताने का एक तरीका है कि वह आपको अपनी आंखों से ओझल नहीं होने देता। आप जरा सा भी इधर-उधर जाएं, वह रोकर आप को अपनी ओर खींच ही लेता है। बच्चा चाहता है कि मां की निगाहें लगातार उसी पर बनी रहें, इसलिए वह तब तक रोता रहेगा, जब तक आप दिखाई ना दें।

बांहें फैलाना

बच्चे की हर उम्र के पड़ाव पर अपना प्यार जताने का अलग तरीका होता है। जब बच्चा घुटनों के बल छोटे-छोटे डग भर के चलने लायक हो जाता है, तब वह कई बार जान कर गिरता है, जान कर उठता है, लेकिन आपको देखकर बांहें फैलाना नहीं छोड़ता है। यह मां के प्रति उसका प्यार और लाड़-प्यार दर्शाने का अपना तरीका है।

10 होममेड ब्यूटी टिप्स हिंदी में – Top 10 Beauty Tips in Hindi

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मौसम कोई भी हो उसका असर त्वचा पर अलग-अलग रूपों में पड़ता ही है और उसके अलावा भी कई ऐसे कारण होते हैं, जिनकी वजह से त्वचा पर समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं ऐसे में इनकम बचाव करना बहुत जरूरी होता है. ताकि त्वचा को ज्यादा नुकसान ना हो पहुंचे और समय रहते प्रॉब्लम को दूर किया जा सके. तो आइये जानते हैं, गर्मी के मौसम में त्वचा पर होने वाली समस्याएं और उनके उपाय…

1. अगर आपके चेहरे की चमक कम हो रही है, तो दही के साथ मक्की का आटा डालकर इसे स्क्रब की तरह इस्तेमाल करें और इसके बाद बादाम का तेल लगाएं.

2. अगर आपका चेहरा काला पड़ जाए तो मुल्तानी मिट्टी में थोड़ा सा मिल्क पाउडर और एक चम्मच सिरका मिलाकर फेसपैक बनाकर इसे अपने चेहरे पर लगाएं.

3. कभी-कभी नाक पर झाइयां हो जाती हैं, इसलिए आप जायफल को घिस पर अपनी नाक पर लगाएं. इससे नाक की झाइयां दूर हो जाएँगी.

4. गुलाब जल नींबू दही और खीरा को एक साथ मिक्स करके इसे अपने चेहरे पर लगाएं. इससे त्वचा में चमक आएगी.

5. हल्दी में थोड़ी-सी ताजी मलाई दूध तथा आटा मिलाकर उबटन बना ले. इस उबटन को चेहरे पर करीब 15 मिनट तक लगाएं और फिर ठंडे पानी से अपना चेहरा धो लें. आपके चेहरे पर एक नई तरो-ताजगी और चमक आएगी.

6. रात को सोने से पहले 10 से 15 बादाम को भिगोकर रख दीजिए. सुबह इन्हें छीलें और इनमें एक चम्मच शहद मिलाकर उसका पेस्ट बना लें और इस पेस्ट को अपने चेहरे पर लगाकर स्क्रब करें. ऐसा करने से चेहरे की सुंदरता बढ़ जाएगी और चेहरे की गंदगी भी साफ होगी.

7. एक चम्मच नींबू के रस में एक चम्मच टमाटर का रस और थोड़ा सा चंदन का पाउडर मिलाकर इस मिश्रण को चेहरे और गर्दन पर लगाएं. 15 मिनट बाद चेहरा धो लें. ऐसा करने से रंग भी साफ दिखने लगेगा और त्वचा भी कोमल हो जाएगी.

8. चेहरे की स्क्रबिंग के लिए टमाटर का टुकड़ा लेकर चेहरे पर हल्के हाथों से मसाज करें. इससे चेहरे की सारी गंदगी साफ हो जाएगी. त्वचा को निखारने के लिए यह स्क्रब काफी अच्छा है.

9. आंखों के नीचे झुर्रियां व डार्क सर्कल से बचने के लिए बादाम के तेल में शहद मिलाकर लगाएं और इसे हल्के हाथों से मलें. और धो लें. आपके चेहरे की झुर्रियां और डार्क सर्कल में काफी सुधार होगा.

10. फेस की क्लींजिंग करने के लिए चावल के आटे में दही मिलाकर पेस्ट बनाएं और इसे चेहरे व गर्दन पर अच्छी तरह से मलें. इसके बाद चेहरे को धो लें.

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धन्यवाद.

रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट में अंतर होता है – What is Repo Rate & Reverse Repo Rate

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रेपो दर (Repo Rate)

बैंकों को अपने दैनिक कामकाज के लिए प्राय: ऐसी बड़ी रकम की जरूरत होती है जिनकी मियाद एकदिन से ज्यादा नहीं होती. इसके लिए बैंक जो विकल्प अपनाते हैं, उनमें सबसे सामान्य केंद्रीय बैंक से रात भर के लिए (ओवरनाइट) कर्ज लेना. इस कर्ज पर रिजर्व बैंक को उन्हें जो ब्याज देना पड़ता है, उसे ही रेपो दर कहते हैं.

रेपो दर में बढ़ोतरी का सीधा मतलब यह होता है कि बैंकों के लिए रिजर्व बैंक से रात भर के लिए कर्ज लेना महंगा हो जाएगा.

साफ है कि बैंक दूसरों को कर्ज देने के लिए जो ब्याज दर तय करते हैं, वह भी उन्हें बढ़ाना होगा. इसके उलट रेपो रेट कम होने से बैंकों के लिए रिजर्व बैंक से कर्ज लेना सस्ता हो जाएगा और इसलिए बैंक ब्याज दरों मे कमी करेंगे ताकि ज्यादा से ज्यादा रकम कर्ज़ के तौर पर दी जा सके.

रेपो रेट कौन तय करता है?

RBI गवर्नर मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक की अध्यक्षता करता है, जिसमें निम्नलिखित अवधि के लिए रेपो दर या वर्तमान रेपो दर तय की जाती है।

रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट का उपयोग मुद्रास्फीति (Inflation)और मुद्रा आपूर्ति को नियंत्रित करने के लिए कैसे किया जाता है:

उच्च दर शासन (High Rate Regime): जब RBI रेपो दर को उच्च रखता है, तो बैंक धन की उच्च लागत के कारण केंद्रीय बैंक से कम पैसा उधार लेते हैं। विशेष रूप से, रिवर्स रेपो दर भी रेपो रेट के साथ मिलकर उच्च है। यह बैंकों को इस पर अधिक आय के कारण, आरबीआई के साथ अपने अधिक धन को रखने के लिए प्रोत्साहित करता है।

निम्न दर शासन (Low Rate Regime): इसके विपरीत, जब RBI रेपो दर को कम रखता है, तो बैंक कम लागत पर इससे अधिक धनराशि उधार ले सकते हैं। एक ही नस में, रेपो रेपो रेट भी रेपो रेट के अनुरूप कम है। इस प्रकार, बैंक केंद्रीय बैंक में कम पैसा लगाने के लिए इच्छुक हैं, क्योंकि यह कम रिटर्न प्राप्त करेगा।

रिवर्स रेपो दर (Reverse Repo Rate)

नाम के ही मुताबिक रिवर्स रेपो दर ऊपर बनाए गए रेपो दर से उल्टा होता है. बैंकों के पास दिन भर के कामकाज के बाद बहुत बार एक बड़ी रकम शेष बच जाती है. बैंक वह रकम अपने पास रखने के बजाए रिजर्व बैंक में रख सकते हैं. जिस पर उन्हें रिजर्व बैंक से ब्याज भी मिलता है. जिस पर यह ब्याज मिलता है, उसे रिवर्स रेपो दर कहते हैं. 

अगर रिजर्व बैंक को लगता है कि बाजार में बहुत ज्यादा तरलता (लिक्विडिटी) है, तो वह रिवर्स रेपो दर में बढ़ोतरी कर देता है, जिसे बैंक ज्यादा ब्याज कमाने के लिए अपना धन रिजर्व बैंक के पास रखने को प्रोत्साहित होते हैं और इस तरह उनके पास बाजार में छोड़ने के लिए कम धन बचता है.

नकद आरक्षी अनुपात (Cash Reserve Ratio)

सभी बैंकों के लिए जरूरी होता है कि वह अपने कुल कैश रिजर्व का एक निश्चित हिस्सा रिजर्व बैंक के पास जमा रखें. इसे नकद आरक्षी अनुपात कहते हैं. ऐसा इसलिए होता है कि अगर किसी भी मौके पर एक साथ बहुत बड़ी संख्या में जमाकर्ता अपना पैसा निकालने आ जाए तो बैंक डिफॉल्ट ना कर सके. आरबीआई जब ब्याज दरों में बदलाव किए बिना बाजार से तरलता (लिक्विडिटी) कम करना चाहता है, तो वह सीआरआर (CRR) बढ़ा देता है.

हाल ही में रिजर्व बैंक को मौद्रिक नीति की सालाना समीक्षा के बाद सीआरआर 8.25 फीसदी हो गया है, यानी बैंकों को अब अपने 100 रुपये के कैश रिजर्व 8.25 रूपये का रिजर्व रखना होगा. इससे बैंकों के पास बाजार में कर्ज देने के लिए कम रकम बचेगी, लेकिन रेपो और रिवर्स रिपो दरों में कोई बदलाव नहीं किए जाने से काँस्ट ऑफ फंड पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

रेपो और रिवर्स रेपो दरें आर बी आई के प्रभावी कदम के रूप में तरलता को तुरंत प्रभावित करने वाले हथियार माने जाते हैं जबकि सीआरआर से सरलता पर तुलनात्मक तौर पर ज्यादा समय में असर पड़ता है.

एक अच्छे करियर के लिए आजमाएं 5 टिप्स – Best 5 Career Tip

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रूचि और योग्यता के अनुसार जो भी काम किया जाये उसे इंसान ज्यादा मेहनत और लगन दिखाता है इसलिए करियर का चुनाव करते समय अगर कुछ बातों पर अमल किया जाये तो आप जीवन में अवस्य सफल होंगें। आइये जानतें है कौन – कौन से हैं वो 5 टिप्स जो आपके करियर के लिए बेस्ट रहेंगे – 

अपने आपको जानिए 

करियर के चुनाव के दौरान सबसे पहले जरूरी है की आप अपने आप को जानिए। एक तरह से अपने खुद की परीक्षा लीजिये की आपका क्या स्तर है। आप कितने योग्य हैं, किस काम को ज्यादा बेहतर ढंग से कर सकते हैं, आपका क्या अनुभव है और आपमें काम करने की कितनी कुशलता है। इस आकलन में अपने मूल्यों, रूचि और व्यक्तित्व को महत्व दें। इन सबको जाचनें के कई तरीके हैं। एक तो अनौपचारिक रूप से किया जा सकता है। इसके तहत कुछ खास  अभ्यास शामिल हैं। इसके अलावा प्रोफेशनल स्तर पर भी कुछ टेस्ट होते हैं, जिनमें आप अपने को परख सकतें हैं। 

परखिये 

कोई निर्णय जल्दबाज़ी में तो नहीं ले रहे हैं, क्योकि ऐसा करना गलत साबित हो सकता है। जिस फील्ड में करियर बनाना चाहतें हैं उसकी आपको गहन जानकारी है की नहीं और आपका निर्णय खुलें दिलों दिमाग से लिया जा रहा है की नहीं। 

योजना सही तरीके से बनाएं 

अपने को परखने के बाद आवशयकता है की लक्ष्य को पाने के लिए सही निति तैयार करें और आगे बढ़ें। लक्ष्य कोई भी हो, चाहें नए काम की शुरुआत हो, काम वही हो, लेकिन वातावरण नया हो। 

योजनाओं पर अमल करें 

अपनी पहली नौकरी छोड़ने से पहले ही आप इस बात की शुरुआत कर देते हैं की आगे आपको किस दिशा में जाना है। अपने आप को पूरी तरह से पहचानने के बाद अपनी योजनाओं को पूरा करने की शुरुआत करें। व्यवसाय करना चाहतें हैं तो इसके लिए अध्ययन शुरू करें। .अगर जरूरी है तो खर्चों में कमी लाएं, दफ्तर खोलने के लिए जगह तलाशें। इससे आपको आर्थिक और निजी तौर पर खतरे की गुंजाइश काम रहेगी। 

विकल्पों को पहचाने 

यह जानना जरूरी है की करियर को लेकर आपके पास क्या विकल्प है और आप किस फील्ड में बेहतर कर सकतें हैं। परिवर्तन की प्रक्रिया में यह सबसे रचनात्मक हिस्सा है। इसके लिए अपने दोस्तों की मदद लीजिये और उन साथियों की राय भी मानें जिनको बिज़नेस के बारे में सही जानकारी है।

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मूंगफली खाने वाले हो जाएं सावधान यह हो सकती हैं प्रॉब्लम्स – Side Effects Of Peanuts in Hindi

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अगर आप भी मूंगफली(peanut) खाने के शौकीन हैं, तो यह खबर आपके होश उड़ा सकती है. वैसे तो मूंगफली सेहत के लिए बहुत ही लाभदायक होती है. मूंगफली प्रोटीन से भरपूर होती है. मूंगफली में विटामिन ए, विटामिन बी, विटामिन सी, और 26 तरह के मिनरल्स पाए जाते हैं. इनमें आयरन और कैल्शियम मुख्य रूप से होते हैं. सर्दी के मौसम में मूंगफली बहुत ही पसंद की जाती है. करीब 100 ग्राम मूंगफली में 567 मिलीग्राम(mg) कैलोरी पाई जाती है.सर्दी के दिनों में सभी को भूनी हुई मूंगफली खाना बहुत ही पसंद होता है. हर रोज अगर आप थोड़ी सी मूंगफली खाते हैं तो यह आपकी सेहत के लिए बहुत ही लाभदायक माना जाता है. 

  • मूंगफली खाने से शरीर को ताकत मिलती है. 
  • ओमेगा 6 से भरपूरमूंगफलीत्वचा को भी कोमल और नम बनाए रखता है.
  • मूंगफली खाने से ख़राब कोलेस्ट्रॉल कम होता है
  • मूंगफली में कई तरह के पोषक तत्व होतें हैं जो बालों को खूबसूरत बनातें हैं 

ज्यादा खाना नुकसानदायक – हर रोज अगर आप थोड़ी सी मूंगफली खाते हैं, तो यह बहुत ही शरीर के लिए लाभदायक मानी जाती है. लेकिन अगर आप बहुत मात्रा में मूंगफली खाते हैं तो यह आपके शरीर के लिए नुकसानदायक भी हो सकती है. यदि आप बहुत ज्यादा मात्रा में मूंगफली खाते हैं तो इससे आपके लीवर में परेशानी हो सकती है.

मूंगफली बॉडी में अफलेटोक्सिन(Aflatoxin) की मात्रा को बढ़ाती है. यह बहुत ही हानिकारक पदार्थ होता है अफलेटोक्सिन(Aflatoxin) की वजह से लिवर में बीमारियां पैदा होने का डर रहता है. मूंगफली कई बार खाने के बाद पेट बहुत भारी-भारी हो जाता है. मूंगफली में लैक्टिन की मात्रा बहुत अधिक होती है. इसे पचा पाना काफी कठिन होता है. लैक्टिन खून में शुगर के साथ मिलकर इन्फ्लेमेशन(Inflammation) पैदा कर देता है. इससे शरीर में दर्द और सूजन बढ़ जाती है.

अर्थराइटिस(Arthritis) के पेशेंट को नहीं खानी चाहिए मूंगफली – अर्थराइटिस(Arthritis) के पेशेंट को कभी मूंगफली नहीं खाने चाहिए हां, थोड़ी-बहुत मात्रा में ले सकता है. डॉक्टर भी अर्थराइटिस के पेशेंट को मूंगफली खाने को मना करते हैं. मूंगफली में मौजूद लैक्टिन (Lactine) के कारण इन मरीजों के शरीर में सूजन बढ़ जाती है.