Wednesday, November 25, 2020

सूचना का अधिकार- आपका हक़ है – What is RTI Act – Right To Information Act in Hindi

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सूचना का अधिकार कानून एक ऐसा रास्ता है जो सरकार और व्यवस्था को जवाबदेह और पारदर्शी बनाता है. जिससे एक भ्रष्टाचार मुक्त समाज बन सकता है. तो आइए जानते हैं, कुछ महत्वपूर्ण बातें इसी कानून के बारे में

आर टी आई क्या है?

इस देश का प्रत्येक नागरिक जब एक छोटी सी छोटी सुई खरीदने से लेकर हवाई जहाज की यात्रा तक करता है, तो वह है किसी न किसी रूप में टैक्स अदा करता है. यहां तक कि अगर कोई भीख मांगने वाला व्यक्ति भी बाजार से कोई चीज खरीदता है, तो अप्रत्यक्ष रूप से टैक्स का भुगतान करता ही है. इसी टैक्स के आधार पर सरकार अपने नागरिकों के लिए सभी सुविधाएं और सुरक्षा मुहैया कराती है.
यहां पर समस्या तब आती है, जब किसी भी प्रकार की जवाबदेही के चलते सरकारें और व्यवस्था अपने काम में ईमानदारी से बर्ताव करना बंद कर देते हैं और जन्म देता है एक भ्रष्टाचार युक्त समाज ऐसे समय में सूचना के अधिकार है, यानी राइट टू इनफार्मेशन (आरटीआई) कानून का महत्व बहुत ही ज्यादा बढ़ जाता है.
सूचना का अधिकार कानून इस देश के हर नागरिक को यह हक देता है कि वह अपनी सरकार और व्यवस्था से अपने द्वारा दिए जाने वाले टैक्स के बदले मिलने वाली सुविधाओं और अधिकारों पर सवाल उठा सके. अपने अधिकार में की जा रही कटौती या गड़बड़ी के बारे में जान सकें. इससे व्यवस्था में कुछ वादों को छोड़कर अधिकांश कार्यों के प्रति जवाबदेही का माहौल बनता है. जब कोई इस सच को समझ लेता है कि किसी जिम्मेदार पद पर बैठकर वह कुछ भी मनमाना करके यूं ही बचकर नहीं निकल सकता तो पारदर्शिता भी बढ़ती है और भ्रष्टाचार भी कम होता है.
यह भी सच्चाई है कि भ्रष्टाचार एक ऐसा अपराध है जो प्रशासन और सरकार के गुप्त अंग संरक्षण में तेजी से फल-फूल रहा है. लेकिन सूचना का अधिकार (RTI) कानून इस भ्रष्ट व्यवस्था की राह का बाधक बन गया है.
आरटीआई एक ऐसा कानून है जिसे मुख्य रूप से भ्रष्टाचार दूर करने के लिए 12 अक्तूबर, 2005 को लागू किया गया था. इस कानून में न सिर्फ केंद्र सरकार के सरकारी प्राधिकरणों को शामिल किया गया है. बल्कि इसमें राज्य और स्थानीय स्तर के सार्वजनिक प्राधिकरणों (जम्मू कश्मीर को छोड़कर जिसे इसके विशेष राज्य के दर्जे की वजह से केंद्रीय कानून में शामिल नहीं किया गया है) को भी समेखित किया गया है. यह उस बुराई के उन्मूलन के लिए सामूहिक तौर पर दो महत्वपूर्ण माध्यम स्पस्टतःता और जिम्मेदारी पर जोर देता है, जो एक अच्छे प्रशासन की राह में रोड़ा बनी हुई है.
आरटीआई कानून सूचना के अधिकार के साथ सार्वजनिक हितों के सौहार्दपूर्ण बनाने में मदद करता है. हालांकि कुछ ऐसे विभाग भी हैं जहां सुनिश्चित किया गया है, कि शासन के कुछ खास दायरों को इस एक्ट के नियम से अलग रखा जाना है.

आवेदन करने के लिए नियम व शर्तें

1. जैसा कि इस कानून में कहा गया है कि किसी तरह की जानकारी चाहने वाला व्यक्ति हिंदी, अंग्रेजी या अपने क्षेत्र की कोई भाषा में लिखित या डिजिटल मोड के जरिए अपील करने का हकदार है. आवेदकों को जरूरी सहायता प्रदान करना पब्लिक इनफॉरमेशन ऑफीसर की जिम्मेदारी है.
2. आरटीआई एक्ट की धारा 4 के अनुसार नागरिक के तौर पर हमें अग्रिम तौर पर अपॉइंटमेंट के जरिए संबंधित कार्यालय का दौरा करने, फाइलों और अधिकारिक रिकॉर्ड्स को जानने और आगामी संदर्भ के लिए फोटो कॉपी लेने की अनुमति हासिल है.
3. आरटीआई आवेदन करने के लिए सामान्य तौर पर ₹10 का मामूली आवेदन शुल्क लगता है, जो काउंटर पर नकदी के तौर पर चुकाया जा सकता है. आवेदन शुल्क का प्रमाण आवेदन के साथ दिया जाना चाहिए.
4. जानकारी मांगने वाले व्यक्ति को उससे संबंधित जरूरी जानकारी के अलावा दूसरी जानकारियां या अतिरिक्त जानकारी के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता.
5. पब्लिक इनफॉरमेशन ऑफीसर द्वारा आवेदन प्राप्त होने के 30 दिन के अंदर मांगी गई जरूरी जानकारी मुहैया कराई जानी चाहिये. यदि जरूरी जानकारी व्यक्ति के जीवन या सतर्कता से संबंधित है, तो यह आवेदन करने के 48 घंटे के अंदर उपलब्ध करा दी जानी चाहिए.
6. यदि पब्लिक इनफॉरमेशन ऑफीसर निर्धारित अनुरोध के संबंध में तय समय सीमा के अंदर जरूरी जानकारी मुहैया कराने में विफल रहता है, तो आवेदक से संबंधित जानकारी मुफ्त में दी जाएगी.
आरटीआई एक्ट के संबंध में कुछ शंकाएं हैं कि यह लोगों को सूचना तक पहुंचने के उनके अधिकार को केवल कागजों तक ही सीमित रखता है तो यह सही नहीं है.
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